बारवाल/गोठवाल मीणा माइक्रो हिस्ट्री

 बारवाल/गोठवाल मीणा माइक्रो हिस्ट्री 

------------------------------------------

प्राचीन मत्स्य राजाओ के वंस में साह हुए वे गढ़ मोरां /मोरू-बोरवा से आकर वर्तमान सवाईमाधोपुर क्षेत्र में बसे | उनके दो पुत्र हुए | प्रथम पुत्र नींबू ने संवत् 999 में ''गोठ ''(तह० बामनवास,सवाईमाधोपुर) बसाई | और दुसरे पुत्र आबू ने अम्बावरा बसाया | नींबू के मेवासे गोठ से निकले ''गोठवाल'' और अम्बावरा-भांवरा (तह० बामनवास,सवाईमाधोपुर) से निकले बारवाल कहलाये | इन्होने कुलदेवी बिनजारी माता को माना |दंतकथा है की मारवाड़ से रास्ते में आते हुए बंजारों से झगड़ा हुआ उसमे एक बिन्जारा लडकी ने मीनों को बचाया इस कारण से बचे हुए मीनाओं ने उसे अपनी रक्षक और देवी अवतार माना और जहाँ बसे उसका स्थान बनाया | वर्तमान गोठ से 5 किलोमीटर दूर प्राचीन माता का थानक बनाया | जिसका भगत टुंडा गोठ गाँव से दुरी होने के कारण वाही बस गया और आज वो टुंडीला गाँव है वैसे अमावरा सहित 6-7 गाँवो माता के स्थान बन गए पर टुंडीला का थानंक सबसे प्राचीन है || कई पीढ़ी बाद अम्बावरा से जाकर छाजल (कालू) ने छारेड़ा बसाया | कई पीढ़ी बाद मदेफर का पुत्र मुरकल्या बारवाल मेवासी(प्रसिद्द मुखिया ) हुआ |प्रसिद्द समाज सुधारक मुनि मगन सागर उखलाना टोंक के गोठवाल ही थे | गोठवाल गोत्र में कुल चंद के 12 लडके हुए जिन्होंने 12 खेड़े बसाये | ऐसे ही महलग का पुत्र लाहाडो गोठवाल(गोठ -सिकरोड़ी, बामनवास ) भी प्रसिद्द मेवासी हुआ | गोठ ,सिकरोड़ी और भांवरा वर्तमान तह०बामनवास सवाईमाधोपुर,गाँव छारेड़ा तह०/जिला दौसा,मुंडिया तह०निवाई जिला टोंक प्राचीन गाँव है | आशापाला कुल वृक्ष को मानते है | इन गोत्रो के गाँव मुख्य रूप से सवाईमाधोपुर,दौसा,करोली और टोंक जिले की तहसीलों में है | | इस गोत्र के लोग राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रो में तो गए ही दुसरे प्रदेशो में भी जाकर बसे है उनमे उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश,और महाराष्ट्र का नाम लिया जा सकता है |गोठवाल गोत महाराष्ट्र मे नावरा तह.भडगाव हातले तह चालीसगाव पाचोरा मे भी है। कहते है राजपुताना से दक्षिण की लड़ाई में खड़की (औरंगाबाद), दौलताबाद गढ़ (देवगिरी) आने के बाद गाँव-नागद के पास के अंकाई किले पर गोठवाल भाईयो ने हाथी का बाजार भराया था । तब ये खबर दिल्ली तक पहुँच गई । ऊन भाईयो को पकड़ने के लिए दिल्ली और औरंगाबाद से कुछ सैनिक आये। लेकिन गोठवाल भाईयो ने चकमा देकर गिरणा नदी के किनारे छुप गये। जहां पर राजाओ के राज की सीमा बदल जाती थी । बाद मे नावरा मे ही बस गये।महाराष्ट्र गए गोठवाल गाँव नागद के पास अकाई किले पर ''हाथी बाजार '' भराया था यह घटना आदलवाडा के भोमिया हाथी बाबा के मेले से तो सम्बन्धित नहीं कही आदलवाडा के गोठवाल दौलताबाद की लड़ाई में गए हो| बारवाल चांडोल,जनुना तह.जि.बुलढाणा, गाँव -पळशी तह कन्नड जि औरंगाबाद गाँव-जंगीपुरा जि जलगाव महाराष्ट्र में बसे हुए है |इस जानकारी को विस्तार देने के लिए सभी का सहयोग चाहिए | इस गोत्र के गाँव और महत्वपूर्ण घटनाये शेयर करे |-पी एन बैफलावत (14-10-17)

Comments