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सुरपनखा कि कहानी और जीवन कि सीख

**"सुरपनखा की कहानी और जीवन की सीख..."** ➡ **रामायण के बाद सुरपनखा** का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, पर कुछ कथाओं में कहा गया है कि वह अपने भाइयों (रावण-कुंभकर्ण) की मृत्यु के बाद जंगलों में तपस्या करने चली गई। उसकी कहानी हमें सिखाती है कि **"क्रोध, ईर्ष्या और प्रतिशोध की आग दूसरों को तो जलाती ही है, पर अंततः स्वयं का भी नाश कर देती है।"** ➡ **सुरपनखा ने राम-लक्ष्मण से बदला लेने के लिए रावण को उकसाया**, परिणाम? **लंका जलकर राख हो गई!** ➡ **दुर्योधन ने पांडवों से ईर्ष्या की**, परिणाम? **कौरव वंश का अंत!** ➡ **आज भी जो लोग समाज में धर्म, जाति या राजनीति के नाम पर लड़ाते हैं**, वे सुरक्षित बैठे रहते हैं, लेकिन **सामान्य जनता का जीवन तबाह हो जाता है।** ✍️ **सीख:** **"जो लोग दूसरों को लड़ाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं, उनके घर में चैन रहता है, पर उनकी वजह से अनगिनत परिवार बर्बाद हो जाते हैं।** **इसलिए, ऐसे भड़काऊ लोगों से सावधान रहें... क्योंकि इनकी लड़ाई में ये बच जाते हैं, लेकिन लड़ने वालों का सर्वनाश होता है!"** 📜 **— विठ्ठलसिंह काकरवा...

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