मीणा समाज" के महान बाहुबली,वीर योद्धा, "हिदा मीणा"

 *"मीणा समाज" के महान बाहुबली,वीर योद्धा, "हिदा मीणा" झरवाल जयपुर(राज)*

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*बाहुबली वीर योद्धा हिदा मीणा, झरवाल का जन्म 18अप्रेल सन् 1688 को जयपुर में हुआ,और बलिदान सन् 1750 में हुआ*।

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*जयपुर के राजा जयसिंह ने सन् 1734 में विष्णु भगवान के नाम पर एक यज्ञ का आयोजन किया,पंडितों ने यज्ञ में वृहद राज विष्णु की असली मूर्ति को दक्षिण भारत में #कांचीपुरम् #से लाने के लिए बोला पहले जयसिंह ने राजस्थान के सभी राजपूत राजाओं,दरबारियों को लाने के लिए बोला सभी ने इतनी दूर 2500-2700Km दूर से लाने के लिए,सभी ने मना कर दिया*।


 *जयसिंह के, दरबारियों सरदारों के मना करने पर जयसिंह ने ,मीणा सरदारों जागीरदारों को बोला सभी ने बाहुबली #हिदा मीणा# का नाम लिया, हिदा मीणा इतना बलशाली था कि अकेला हजार योद्धाओं को मार कर जीत हासिल कर लेता था।ऐसा उसने कई युद्धो में किया।* 


*जयसिंह ने #हिदा मीणा# को जिम्मेदारी दी तो उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया*। 

*#हिदा मीणा# घोड़े पर सवार होकर #दक्षिण भारत में #कांचीपुरम्# जाकर पहले वहां के राजा से मुर्ति के लिए आग्रह किया,तो उसने मूर्ति देने से मना कर दिया*।


*तब हिदा मीणा ने अकेले वहां के राजा के हजारों सैनिकों को युद्ध में मौत के घाट उतार कर #विष्णु भगवान की,प्राचीन मूर्ति को पीठ पर बांधकर जयपुर लेकर आया*। 


*हिदा मीणा ने साथ में कांचीपुरम से मूर्ति की पुजा करने वाले पंडित और उसके परिवार को भी साथ में जयपुर आया*।

इसलिए हिदा मीणा को तब से बाहुबली हिदा मीणा कहा जाता है । 

*जयसिंह के जमाने का #हिदा मीणा# प्रथम बाहुबली वीर योद्धा रहा था*।

*जयपुर सहित राजस्थान के बड़े-बड़े राजघरानों के राजा, बाहुबली हिदा मीणा के इस बहादुरी के प्रयास से अचंभित हो गये थे*।


 *जयसिंह ने खुश होकर हिदा मीणा को इनाम देना चाहा तो हिदा मीणा ने मना कर दिया*।

*अत्यधिक आग्रह किया तो हिदा के नाम पर घाटगेट दरवाजे के पास एक छोटी मोरी/रास्ता बनाने के लिए बोला*। 

*जयसिंह ने घाटगेट दरवाजे के पास परकोटे के किले की चारदिवारी में हिदा झरवाल के महल के पास,एक मोरी का नाम #हिदा मीणा# के नाम पर कर दिया,आज भी सरकारी रिकार्ड में हिदा की मोरी नाम दर्ज है*। 


*हिदा की मोरी बनने के बाद वह जयसिंह के महलो और परकोटे से बाहर हिदा झरवाल बिना रोक-टोक के आने-जाने लगा,इससे राजस्थान के बड़े-बड़े राजा और राज दरबारी कुंठित और चिढ़ने लगे*। 


*हिदा मीणा को ठिकाने लगाने के लिए विभिन्न षड्यंत्र रचने लगे लेकिन वे सफल नहीं हुए*।


*एक दिन एक, सामान्य हिदा नाम के व्यक्ति की किसी से, आपसी झगड़े में मौत हो गई*।


*उधर जयसिंह के ,दरबारियों को षड्यंत्र रचने का मौका मिल जाता है,और वे बाहुबली असली हिदा मीणा का नाम लेकर उसे अपराधी घोषित करवा कर मरवा देते हैं*।


*जय सिंह के पास जाकर झूँठ-मुँठ अनेक बातें असली हिदा मीणा का नाम लेकर जय सिंह के कान भर देते हैं*।

*तब जयसिंह ने भी बिना सोचे समझे,बाहुबली हीदा मीणा के नाम एक आदेश, जयगढ़ के किले पर तोप से बाँधकर उड़ाने का आदेश दिया*।


*आदेश की कॉपी मिलते ही सभी राज दरबारी,सामान्य हिदा की जगह असली #हिदा_मीणा# योद्धा को लेकर #तोप से बांध देते हैं*।


*"हिदा मीणा" भी राजाज्ञा को सिर से लगाकर मौत को गले लगाने के लिए तोप से बंधने के बाद, गोले से उड़ा दिया जाता है*।


*मृत्युदंड से पहले हिदा मीणा ने ईश्वर से प्रार्थना की, मेरा‌ सिर मेरे पुश्तैनी गांव, डोडा‌ चौड़ कानोता बस्सी में जाकर गिरे,ऐसा ही हुआ,उनका सिर,‌जयपुर से 25‌ किलोमीटर दूर उनके पुश्तैनी घर गिरा, अपने आपको मातृभूमि के लिए हीदा मीणा ने बलिदान कर दिया*।


 *जयपुर में घाट गेट , दरवाजे के पास,अपने महल के पास,#हिदा मीणा भौमियां जी# के रूप में आज भी पुजे जा रहे हैं*। 

*सर्व समाज और हिदा झरवाल के वंशजों ने उनके नाम से गांव और घाटगेट जयपुर में मंदिर बनवाया है,आज भी जनहित में लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण कर रहे है*।


*बाद में राजा जय सिंह को असलियत का पता चला तो अपने दरबारियों को खूब फटकारा और कहा आप लोगों ने मेरे हाथ से  निर्दोष,बाहुबली,चेहते योद्धा को मरवा दिया*।

राजा जयसिंह इसी आत्मग्लानि और चिंता में  भी कुछ समय बाद मृत्यु‌ को प्राप्त हो गए।

*बाद में,जयसिंह ने सहानुभूति वश उनके परिवार को जयपुर के पास साईवाड़ गाँव की जागीर इनके नाम कर दी गई*। 

*हिदा मीणा राजा जयसिंह के राजदरबारियों के षड्यंत्र का शिकार होकर अपने आपको मातृभूमि के लिए बलिदान कर दिया*।


*#हिदा झरवाल मीणा# समाज के‌ एक महान् बाहुबली वीर बहादुर‌ बुद्धिमान शक्तिशाली योद्धा थे, मीणा समाज के साथ,समस्त राजस्थान की जनता को हिदा मीणा बाहुबली योद्धा पर गर्व है*।


*18अप्रेल 2023को हिदा मीणा की 335वीं जयंती समस्त मीणा समाज द्वारा प्रमुख स्थानों पर धुमधाम से मनाई जानी चाहिए*।

अजय झरवाल एंड टीम को,लिखते हुए, गर्व महसूस हो रहा है, हमारे मीणा समाज के पुर्वज कितने बलशाली,वीर योद्धा थे, दुःख होता है,  दुर्भाग्य से मीणा समाज अपने ही बहुत से शुरवीरों महान् शासकों को, इतिहास में भुला दिया है, जिन्होंने इस धरा पर हजारों वर्षों तक राज किया था।

*मीणा समाज के गौरव महाबलशाली वीर हिदा मीणा की 335वीं जयंती पर कोटि-कोटि नमन* 👏👏 



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क्षत्रिय महाराष्ट्र  मीणा समाज...

अजय झरवाल एंड टीम

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