कोरेगांव भीमा युद्ध में मीणा का योगदान
** *कोरेगांव भीमा युद्ध में मीणा* "लेखक: विठ्ठलसिंह काकरवाल जी - साभार"
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कोरेगांव भीमा युद्ध में मीणा सैनिकों का योगदान
१ जनवरी १८१८ को महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीमा नदी किनारे स्थित कोरेगांव गांव में एक ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया। इस युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेनाओं का मुकाबला किया। इस संघर्ष को 'कोरेगांव की लड़ाई' के नाम से जाना जाता है।
ब्रिटिश सेना में मुख्यतः महार जाति के वीर सैनिक थे, परंतु उनके साथ राजस्थान, माळवा और बुंदेलखंड से आए हुए कुछ मीणा योद्धा भी सम्मिलित थे।
इतिहास अनुसंधान से ज्ञात होता है कि कोरेगांव भीमा की इस भीषण लड़ाई में दो मीणा सैनिक भी शहीद हुए थे। ये दोनों सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की द्वितीय बटालियन से जुड़े थे और उन्होंने अदम्य साहस के साथ पेशवा सेना का सामना करते हुए वीरगति प्राप्त की।
ब्रिटिशों द्वारा पुणे में बनाए गए 'कोरेगांव विजय स्तंभ' पर शहीद सैनिकों के नाम खुदवाए गए हैं। हालांकि जाति या समुदाय का उल्लेख सीधे तौर पर नहीं किया गया है, फिर भी विस्तृत फौजी अभिलेखों और अध्ययनों से मीणा सैनिकों का बलिदान प्रमाणित होता है।
मीणा समुदाय के इन वीर सपूतों का यह बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान का एक अमूल्य उदाहरण है।
यह ऐतिहासिक तथ्य मीणा समाज की गौरवशाली सैन्य परंपरा को उजागर करता है, जो मराठों और अंग्रेजों के समय में भी रणभूमि पर डटे रहे और अपनी मातृभूमि के लिए प्राण अर्पण कर दिए।
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लेखक: विठ्ठलसिंह काकरवाल जी — साभार
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