ढेकु [जातेगांव नांदगांव नाशिक के युद्ध मेः मीणा सैनिकों का बलिदान

--- *ढेकु (जातेगांव, नांदगांव, नाशिक) के युद्ध में मीणा सैनिकों का बलिदान* लेखक: विठ्ठलसिंह काकरवाल (महाराष्ट्र मीणा समाज कार्यकर्ता) इतिहास में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जो भले ही बड़ी लड़ाइयों के साए में छुप जाती हैं, लेकिन उनका महत्व किसी भी मायने में कम नहीं होता। ऐसी ही एक वीरता की गाथा महाराष्ट्र के नाशिक ज़िले की नांदगांव तहसील के ढेकु (जातेगांव) गांव के समीप घटी थी। यह वह समय था जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और हैदराबाद के निज़ाम के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। इस संघर्ष में, राजस्थान की वीरभूमि से आए मीणा सैनिकों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मराठा साम्राज्य के समय से ही मीणा समाज के वीर योद्धा दक्षिण भारत में विभिन्न सेनाओं में सेवा कर रहे थे। जब अंग्रेज़ और निज़ाम की सेनाएं महाराष्ट्र के भूभाग पर अपना अधिकार जमाने के लिए लड़ रही थीं, तब मीणा सैनिक स्थानीय स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए डटे रहे। ढेकु के पास हुई इस लड़ाई में मीणा सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा की। इस युद्ध में कई मीणा योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए। आज भले ही इतिहास की पुस्तकों में इस घटना का अधिक उल्लेख न मिले, परन्तु स्थानीय जनमानस में इन शहीदों की गाथाएं आज भी जीवित हैं। यह बलिदान इस बात का प्रतीक है कि मीणा समाज ने भारत की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने रक्त से इतिहास लिखा है। हमें गर्व है कि हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और स्वाभिमान का अमूल्य धरोहर सौंपी। आज आवश्यकता है कि हम इस इतिहास को संजोएं, संवारें और गर्वपूर्वक अगली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। ढेकु के युद्ध में शहीद हुए वीर मीणा सैनिकों को शत-शत नमन! --- (साभार: विठ्ठलसिंह काकरवाल, महाराष्ट्र मीणा समाज कार्यकर्ता) ---

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